Rajasthan

World Wolf Day: विलुप्ति की कगार पर भेड़िया, राजस्थान में बचे हैं महज 532, ताजा रिपोर्ट ने मचाई खलबली

हाइलाइट्स

विश्व भेड़िया दिवस आज
विलुप्ति की कगार पर पहुंची भेड़िया प्रजाति
भारतीय वन्यजीव संस्थान के आंकड़े चिंताजनक

जयपुर. हर साल 13 अगस्त को विश्व भेड़िया दिवस मनाया जाता है. भेड़िया इस समय विलुप्त होती प्रजातियों में बेहद चिंताजनक स्थिति में आ गया है. भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले सुनहरी भेड़िये भयंकर खतरे में हैं. ताजा स्टडी में चेताया गया है कि अब जंगलों में इसकी तादाद इतनी कम हो चुकी है, अगर इन्हें बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया तो यह प्रजाति इस धरती से विलुप्त होने की कगार पर है. लंबे समय से जंगलों में भेड़िए की तादाद लगातार लगातार कम होती जा रही है.

राजस्थान में 2020 के बाद से वन्यजीव गणना जारी नहीं की गई है. भारतीय वन्यजीव संस्थान के शोध के बाद जो आंकड़े राजस्थान से भेजे गए हैं उसके मुताबिक पूरे राजस्थान में अब महज 532 भेड़िये ही बचे हैं. आजादी से पहले प्रदेश में इनकी संख्या बहुतायत में थी. लेकिन अब इनकी तादाद लगातार घटती जा रही है. राजस्थान में साल 2001 की वन्यजीव गणना में भेड़ियों की संख्या 896 पर सिमट गई थी जिसकी वजह से उसे अति संकटग्रस्त श्रेणी में शामिल किया गया है.

भेड़िया संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत
एक दौर था जब न सिर्फ भारत में बल्कि एशिया महाद्वीप के कई देशों के जंगलों में भेड़िए का वर्चस्व था. इंसानी आबादी बढ़ने के बाद भेड़िये के आवास लगातार घटते गए. भेड़- बकरी इसका पसंदीदा शिकार होते थे इसलिए पशुपालकों और किसानों के टकराव में सबसे ज्यादा भेड़िये मारे गए. सरकार की तरफ से इनके संरक्षण की दिशा में कोई दिलचस्पी नहीं देखने को मिलती है. पिछले कुछ बरसों में इनकी संख्या 1596 तक पहुंचने के बावजूद अब प्रदेश में महज 532 भेड़िए ही बचे हैं.

जयपुर में कराया जा रहा सफल प्रजनन
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की इस स्टडी के को-ऑथर और भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञ डॉ. बिलाल हबीब का कहना है कि भेडियों के हालात बेहद चिंताजनक हैं. ऐसा नहीं है कि केवल राजस्थान में ही भेड़िये लुप्त होते जा रहे हैं, बल्कि पूरे देश में भेड़ियों की हालत बदतर हो चुकी है. लगातार घटते खुले घास के जंगलों की वजह से भेड़ियों के लिए चुनौतियां बढ़ गईं हैं. अच्छी बात यह है कि जो जीव पूरी दुनिया में खत्म हो रहा है उसका सफल प्रजनन केवल जयपुर में करवाया जा रहा है. नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में इसकी कैप्टिव ब्रीडिंग के लिए पांच जोड़े बनाये गए हैं. भविष्य में यहां प्रदेश के जंगलों में भी भेडिये छोड़ने को लेकर रिवाइल्डिंग की योजना है.

Tags: Jaipur news, Rajasthan government, Rajasthan news, Wildlife news in hindi

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