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MP में गुमशुदा बच्चों के डराने वाले आंकड़े, 2022 में प्रतिदिन गायब हुई 24 लड़कियां, इंदौर-भोपाल से गायब होते हैं सबसे ज्यादा बच्चे

भोपाल. लोकसभा में सांसद बृजेंद्र सिंह के एक सवाल के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने जो जानकारी दी है वो होश उड़ा देने वाली है. देशभर में बीते साढ़े पांच साल में 2,75,125 गायब हुए हैं. इनमें सबसे ज्यादा बच्चे 61,102 बच्चे मप्र से गायब हुए हैं. राज्य से गायब होने वाले बच्चों में 49024 लड़किया हैं, इस तरह गायब होने वाले बच्चों में 80 फीसदी से ज्यादा बालिकाएं हैं. प्रदेश से गायब हुए बच्चों में से 11850 लड़कों, 45108 लड़िकयों को तलाश कर लिया गया है.

मध्य प्रदेश लापता बच्चों की स्थिति को समझने के लिए, बाल अधिकार समर्थकों द्वारा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और संबंधित राज्यों के राज्य पुलिस विभाग से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से जानकारी जुटाई है. चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) ने मध्य प्रदेश से लापता बच्चों की स्थिति पर आरटीआई डेटा का विश्लेषण किया है. इसके मुताबिक वर्ष  2022 मे प्रतिदिन 24 लड़कियों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई.

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आंकड़ों के जरीए जानिए मध्य प्रदेश में किस जिले से कितने बच्चे गायब हुए. हालांकि इन बच्चों में बड़ी संख्या में लड़कियां गायब हुई है.

इंदौर-भोपाल में गुमशुदगी के सबसे ज्यादा मामले
वर्ष 2022 में इंदौर और भोपाल में बच्चों के लापता होने के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. इंदौर में 2022 में बच्चों के लापता होने के 977 मामले दर्ज किए गए, जबकि भोपाल में लापता बच्चों के 661 मामले दर्ज किए गए हैं. आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों मे बच्चों के गुमक्षुदगी के ज्यादा मामले दर्ज हैं.

मानव तस्करी के शिकार होते लापता बच्चे
चाइल्ड राइट एंड यू (क्राई) उत्तर क्षेत्र की निदेशक सोहा मोइत्रा का मानना है कि लापता होने वाले बच्चे अक्सर मानव तस्करी का आसान शिकार होते हैं. फैक्टशीट के अनुसार मध्य प्रदेश में 2022 में लापता हुए बच्चों में 75% से ज्यादा (संख्या में 8,844) लड़कियां थीं. यह गंभीर चिंता का विषय है कि लापता बच्चों में लड़कियों की संख्या काफी अधिक होने की प्रवृत्ति पिछले 5 वर्षों से लगातार बनी हुई है.

व्यावसायिक देह व्यापार का लड़कियां होती शिकार
मोइत्रा ने कहा कि लापता होने वालों में लड़कियों की ज्यादा संख्या की वजह घरेलू कामकाज में उनकी मांग, व्यावसायिक देह व्यापार हो सकता है और कई बार लड़कियां घरेलू हिंसा, दुर्व्यवहार और उपेक्षा का शिकार होकर मजबूरन घर से भाग जाती हैं. महामारी के दौरान असंगठित क्षेत्र में सस्ते कामगारों की कमी के कारण बाल मजदूरी की मांग बढ़ी है. लापता लड़कों की संख्या में वृद्धि भी चिंता का विषय है, यह सभी कारण राज्य में बाल तस्करी के बढ़ते जोखिम का संकेत देते हैं.

Tags: Bhopal news, Child trafficking, Mp news

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