Rajasthan

दूध और बर्फ के घोल से तैयार होती है ये मिठाई, यहां के लोग सिर्फ सावन में लेते हैं इसका स्वाद

मोहित शर्मा/ करौली. राजस्थानी जायकों में पारंपरिक व्यंजन घेवर का अपना एक अलग अंदाज है. अगर राजस्थान में रहकर आपने इस मिठाई का स्वाद नहीं चखा तो फिर क्या खाया. आकार में गोल और स्वाद में कुरकुरी लगने वाली इस मिठाई की बात ही कुछ निराली है.

हालांकि राजस्थान के बड़े शहरों में अब यह मिठाई पूरे साल उपलब्ध हो जाती है. मगर राजस्थान के करौली में घेवर का स्वाद केवल 1 महीने ही मिल पाता है. यहां के लोगों के लिए मैदा, दूध और घी के गोल से बनने वाली इस मिठाई के स्वाद का इंतजार पूरे साल रहता है. क्योंकि यहां पर घेवर केवल सावन के महीने में ही मिल पाता है. सावन में अपना महत्व रखने के कारण, यहां के लोग सावन में ही इस मिठाई को खाना बेहद पसंद करते हैं. तो आइए जानते हैं यहां पर बनने वाले सावन के खास घेवर के बारे में.

ऐसे तैयार होते हैं घेवर
हनुमान मिष्ठान भंडार के महेश गुप्ता बताते हैं कि करौली में सावन की स्पेशल मिठाई घेवर है. यहां पर घेवर मैदा, दूध व बर्फ के घोल से तैयार किए जाते हैं. इन्हें बनाने के लिए सबसे पहले घोल को अच्छी तरह फेंटा जाता है. उसके बाद बोतल में इस घोल को भरकर बड़ी कढ़ाई में घेवर के सांचों में इस घोल को डाला जाता है.

केवल सावन में बनती है यहां घेवर की 3 वैरायटी
कई सालों से सावन की इस मिठाई को बनाने वाले मुकेश बिंदल ने बताया कि करौली में घेवर केवल सावन के 1 महीने में ही बनते हैं और रक्षाबंधन के तक चलते हैं. उन्होंने बताया कि करौली में घेवर 3 प्रकार का बनाया जाता है. जिसमें एक सादा, दूसरा मावे का और तीसरा मलाई का घेवर बनाए जाते हैं.

मावे वाले घेवर की रहती हैं ज्यादा मांग
घेवर व्यापारी मुकेश बिंदल बताते हैं कि करौली में सबसे ज्यादा मांग मावे वाले घेवर की रहती है. जिसे सादा घेवर के ऊपर मावे का लेप लगाकर और उस पर ड्राई फ्रूट्स डालकर तैयार किया जाता है. इसे लोग सोगियों में ले जाने के लिए ज्यादा पसंद करते हैं. वह बताते हैं कि करौली में ₹150 की कीमत से लेकर ₹400 तक की कीमत के कई घेवर बिकते हैं.

Tags: Food 18, Local18

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