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Patrika Corona Mahamari Se Mukabala Latest News – पत्रिका बना सेतु तो आगे आए उद्योग, कोई दे रहा ऑक्सीजन तो किसी की ट्रक की पेशकश

अमृतम जलम्, एक मुट्ठी अनाज योजना जैसे सफल सामाजिक सरोकारों के बाद कोरोना महामारी में जरूरतमंद और मददगारों के बीच राजस्थान पत्रिका ‘महामारी से महामुकाबला’ अभियान के जरिए सेतु बना तो पूरे प्रदेश में उद्योगपति और औद्योगिक संगठन भामाशाह बन कर सामने आए हैं।

जयपुर। अमृतम जलम्, एक मुट्ठी अनाज योजना जैसे सफल सामाजिक सरोकारों के बाद कोरोना महामारी में जरूरतमंद और मददगारों के बीच राजस्थान पत्रिका ‘महामारी से महामुकाबला’ अभियान के जरिए सेतु बना तो पूरे प्रदेश में उद्योगपति और औद्योगिक संगठन भामाशाह बन कर सामने आए हैं। किसी के पास ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था है तो कोई निशुल्क खाना और दवाएं देने को तैयार है।

ये संगठन और उद्यमी पहले से यह कार्य कर भी रहे हैं। सभी का कहना है कि वे इससे अधिक मदद भी कर सकते हैं, लेकिन इस बारे में सरकार उनकी सहायता करे। राजस्थान पत्रिका के इस अभियान का उद्देश्य भी यही है कि वास्तविक जरूरतमंद तक मदद कैसे पहुंचे। इसी विषय को लेकर राजस्थान पत्रिका ने बुधवार को प्रदेश भर के बड़े उद्यमी और औद्योगिक संगठनों से वर्चुअल माध्यम से चर्चा की। मदद की क्षमता, समस्या और समाधान तथा सरकार से अपेक्षाओं पर उद्यमियों ने अपनी बात रखीं। हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं उनके कथन, समस्या और संभावित समाधान।

समस्या और समाधान
आइसोलेशन सेंटर: अस्पतालों में बैड की किल्लत है। आइसोलेशन सेंटर और कोविड केयर फैसेलिटी का अभाव है।

समाधान- औद्योगिक क्षेत्रों और शिक्षण संस्थानों में बड़े हॉल और ओपन स्पेस है। उद्योगों और संस्थानों की सहायता से इनको आइसोलेशन सेंटर में तब्दील किया जा सकता है।

वित्तीय संसाधनों का अभाव: एक ओर जहां श्रमिक तबका इलाज का बोझ नहीं उठा सकता, वहीं महामारी में सरकार के वित्तीय संसाधन भी सीमित हुए हैं।

समाधान- सरकार गरीबी, कुपोषण, शिक्षा जैसे विषयों पर सीएसआर खर्च को अनुमति देती है। ऐसे में उपचार और कोविड केयर को भी इस मद में अनुमत करे तो उद्योगों को भी राहत मिलेगी और अधिकाधिक मरीजों को समय से उपचार मिल सकेगा।

पलायन: इलाज नहीं मिलने के भय से अब श्रमिक पलायन संभव है। इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर पड़ेगा।

समाधान- उद्योगों के सहयोग से सरकार इन श्रमिकों के लिए अस्थायी आवास और केयर फैसेलिटी औद्योगिक क्षेत्रों में ही विकसित करे। ताकि उन्हें यह भरोसा हो कि यदि वे बीमार हुए तो इलाज जरूर मिलेगा।

खाना-पीना: पिछली लहर में मरीजों और परिजनों के लिए भोजन वितरण के लिए कई संस्थान आगे आए,लेकिन इस बार ऐसा कम ही दिख रहा है।

समाधान- कई उद्यमियों और औद्योगिक संगठनों ने अस्पतालों के बाहर मरीज के परिजनों को भोजन मुहैया कराना शुरु किया है। सरकार इनको वास्तविक जरूरत वाले स्थान बताए तो सामूहिक प्रयासों से ये कार्य हो सकता है।

किसने क्या कहा
हम मुफ्त सीटी स्कैन, जरूरतमंदों को ऑक्सीजन सिलेंडर, एम्बुलेंस और मरीजों के परिजनों को फ्री खाना जैसी सहायता हमारे पास उपलब्ध हैं। आज जरूरत इस बात की है कि वास्तविक जरूरतमंद, मरीज और प्रभावितों तक मदद कैसे पहुंचे।
सुरेश अग्रवाल, अध्यक्ष फोर्टी

ऑक्सीजन और वैक्सीनेशन को बढ़ाना आज चुनौती हैं। सरकार की सख्ती से होम आइसोलेशन वालों को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। इसके लिए सिस्टम बने। कोविड पर किए खर्च को सीएसआर में अनुमत करें तो बड़ा फायदा होगा।
जगदीश सोमानी, अध्यक्ष वीकेआई री-क्रिएशन

ऑक्सीजन की उपलब्धता है, लेकिन परिवहन के इंतजाम नहीं। फाडा की ओर से हम नए आ रहे टैंकरों के लिए चार ट्रक मुहैया करा सकते हैं। सरकार को प्रस्ताव दिया है। नाइट्रोजन सिलेंडर, पीएसए मशीन के रूपांतरण कर इसे ऑक्सीजन में काम लेने के लिए भी उद्योग सहयोग करें।
शार्विक शाह, स्टेट चेयरपर्सन एफडीए, राजस्थान

सरकार कोविड संक्रमण की रोकथाम में किए गए खर्च को सीएसआर में अनुमति दे। इससे बड़े पैमाने पर लोगों की मदद उद्योग कर सकेंगे। जल्द इस पर फैसला होना चाहिए।
कंवलजीत नागपाल- निदेशक, प्रेम मोटर्स

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